The Conceptual Notion of Alternative Democracy in the Modern Digital Age and the Possibilities of Reconstructing Real Democracy in India: A Discussion

आधुनिक डिजिटल युग में वैकल्पिक लोकतंत्र की संकल्पनात्मक अवधारणा और भारत में वास्तविक लोकतंत्र की पुनर्रचना की सम्भावनाएँ: एक विमर्श

Authors

  • Dr. Ashutosh Sharan (Ph.D.) Department of Gandhian and Peace Studies, Mahatma Gandhi Central University, Bihar Author

DOI:

https://doi.org/10.31305/rrjss.2025.v05.n02.005

Keywords:

Alternative Democracy, Real Democracy, Public Participation, Sarvodaya, Accountability

Abstract

This study presents a comparative and analytical examination of the theoretical foundations of major democratic models worldwide. It identifies key challenges that hinder the realization of “true democracy” in India, including inequality in development, lack of access to basic resources, corruption, political polarization, centralization of power, and violations of human rights. At present, India faces a decline in civil liberties and institutional integrity, as reflected in major global indices such as Freedom House and the Economist Intelligence Unit. To address these democratic challenges, the paper envisions the creation of a new democratic theory based on Gandhian ideals such as Sarvodaya and Gram Swaraj. It examines India’s democratic journey, current challenges, e-governance, and applications of democratic decentralization. The goal is to reconstruct a more inclusive, accountable, and participatory democracy that ensures universal development and upholds the spirit of Sarvodaya through sound policy recommendations. The study recommends empowering Panchayati Raj institutions, adopting collaborative models such as citizens’ assemblies, and ensuring equitable distribution of resources through universal basic services. The primary objective of this research is to propose an innovative alternative democratic framework grounded in institutional reform, civic engagement, and the cultivation of a democratic culture rooted in inclusivity, accountability, and justice for all—as envisioned by Mahatma Gandhi in the concept of Sarvodaya. This framework seeks to ensure that citizens truly recognize governance as their own, where equality and inclusive development prevail universally.

 Abstract in Hindi Language: यह अध्ययन विश्व के प्रमुख लोकतांत्रिक मॉडल के सैद्धांतिक आधारों की गहराई से जाँच करते हुए एक तुलनात्मक और विश्लेष्णात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है । यह आलेख भारत में "वास्तविक लोकतंत्र" की प्राप्ति में बाधा डालने वाली महत्वपूर्ण चुनौतियों की पहचान करता है, जिनमें विकास की असमानता, सर्वत्र मूलभूत संसाधनों की पूर्ति का अभाव, भ्रष्टाचार, राजनीतिक ध्रुवीकरण, शक्ति का केंद्रीकरण और मानवाधिकारों का हनन शामिल है । वर्तमान समय में भारत नागरिक स्वतंत्रता और संस्थागत अखंडता में गिरावट का सामना कर रहा है, जैसा कि फ्रीडम हाउस और इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट जैसे प्रमुख सूचकांकों द्वारा दर्शाया गया है । इन चुनौतियों के लोकतांत्रिक समाधान के लिए यह शोध आलेख गांधीवादी आदर्शों जैसे सर्वोदय और ग्राम स्वराज की अवधारणा तथा भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, उसकी वर्तमान चुनौतियाँ, ई-शासन तथा लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के अनुप्रयोगों का विस्तृत अध्ययन करते हुए एक नवीन लोकतांत्रिक सिद्धांत निर्माण की परिकल्पना करता है, ताकि भारत में एक अधिक समावेशी, उत्तरदायी और सहभागी लोकतंत्र, सार्वभौमिक विकास सुनिश्चित करने और सर्वोदय की भावना को बनाए रखने के उद्देश्य से नीतिगत सिफारिशों को समायोजित करते हुए एक वास्तविक लोकतंत्र का पुनर्निर्माण किया जा सके । यह अध्ययन पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाने, नागरिक सभाओं जैसे सहयोगात्मक मॉडल को अपनाने और सार्वभौमिक बुनियादी सेवाओं के माध्यम से संसाधनों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करने की सिफारिश करता है । इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य एक नवीन वैकल्पिक लोकतांत्रिक ढाँचे की संस्तुति करना है जो संस्थागत सुधार, नागरिक जुड़ाव और एक ऐसी लोकतांत्रिक संस्कृति के पोषण पर आधारित हो, जो समावेशिता, जवाबदेही और सभी के लिए न्याय पर आधारित हो, जैसा कि गांधीजी ने सर्वोदय की परिकल्पना की थी । यह ढाँचा यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि आम नागरिक वास्तव में यह समझें कि शासन उनका है और सर्वत्र समानता तथा समावेशी विकास विद्यमान है ।

Keywords: वैकल्पिक लोकतंत्र, वास्तविक लोकतंत्र, जनभागीदारी, सर्वोदय, जवाबदेही

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Published

2025-12-31

How to Cite

Sharan, A. (2025). The Conceptual Notion of Alternative Democracy in the Modern Digital Age and the Possibilities of Reconstructing Real Democracy in India: A Discussion: आधुनिक डिजिटल युग में वैकल्पिक लोकतंत्र की संकल्पनात्मक अवधारणा और भारत में वास्तविक लोकतंत्र की पुनर्रचना की सम्भावनाएँ: एक विमर्श. Research Review Journal of Social Science , 5(2), 37-48. https://doi.org/10.31305/rrjss.2025.v05.n02.005